मंगल की सेवा सुन मेरी देवा
भक्ति संगीत
॥ आरती ॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी ध्वज नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, संतन के भण्डार भरे।
संठन के भण्डार भरे, भक्तन के भण्डार भरे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शंकर ध्यान धरे।
सेवा साधु करे तेरे द्वारे, नर मन ध्यान धरे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
शुम्भ निशुम्भ को मार गिराया, रक्तबीज को भस्म किया।
मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगे।
जाकी जोत जले दिन राती, सुर नर मुनि ध्यान धरे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
कंस विदारण रास विहारण, रूप अनेक धरे।
रूप अनेक धरे मैया, रूप अनेक धरे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
कहते देवी दास भैया, तेरी शरण पड़े।
रखो लाज भक्त की मैया, संकट दूर करे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी ध्वज नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
॥ जय माँ काली ॥
॥ जय महाकाली ॥