Maa Kali

माँ काली आरती

॥ ॐ क्रीं कालिका यै नमः ॥

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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा

भक्ति संगीत

॥ आरती ॥

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।

पान सुपारी ध्वज नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, संतन के भण्डार भरे।

संठन के भण्डार भरे, भक्तन के भण्डार भरे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शंकर ध्यान धरे।

सेवा साधु करे तेरे द्वारे, नर मन ध्यान धरे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

शुम्भ निशुम्भ को मार गिराया, रक्तबीज को भस्म किया।

मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगे।

जाकी जोत जले दिन राती, सुर नर मुनि ध्यान धरे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

कंस विदारण रास विहारण, रूप अनेक धरे।

रूप अनेक धरे मैया, रूप अनेक धरे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

कहते देवी दास भैया, तेरी शरण पड़े।

रखो लाज भक्त की मैया, संकट दूर करे॥

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे...

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े।

पान सुपारी ध्वज नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥

॥ जय माँ काली ॥

॥ जय महाकाली ॥