शोर से भरी दुनिया में अपनी आंतरिक ध्वनि को खोजने की यात्रा।
वेदों के ज्ञान और आधुनिक न्यूरोसाइंस का अद्भुत संगम।
नाम जप केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि एक न्यूरो-कॉग्निटिव एक्सरसाइज है।
"यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि"
भगवान कृष्ण कहते हैं, "समस्त यज्ञों में मैं जप यज्ञ हूँ।" यह अहिंसक और सर्वोच्च यज्ञ है।
ब्रह्मा जी ने नारद से कहा कि कलयुग के दुष्प्रभावों को केवल 'नाम' (हरे राम...) द्वारा ही धोया जा सकता है। यह 16 शब्दों का महामंत्र 16 कलाओं के अज्ञान को नष्ट करता है।
53 वर्षों की तपस्या का सार - यहाँ 'चमत्कार' नहीं, 'विश्वास' और 'ध्वनि' का विज्ञान काम करता है। ईश्वर नीयत देखता है, कर्मकांड नहीं।
जाप से गले में होने वाला कंपन वेगस नर्व को उत्तेजित करता है, जो सीधे पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम (Rest & Digest) को सक्रिय कर तनाव कम करता है।
जाप के दौरान मस्तिष्क 'बीटा' (तनाव) से 'अल्फा' (विश्राम) और 'गामा' (उच्च चेतना) तरंगों में शिफ्ट होता है। यह DMN को शांत करता है।
'राम' शब्द का 'रा' ध्वनि पेट (अग्नि तत्व) को सक्रिय करता है, जिससे आत्मविश्वास और चयापचय (Metabolism) बढ़ता है।
स्थूल से सूक्ष्म की ओर यात्रा (Vaikhari to Ajapa)
जोर से बोलकर किया गया जप। शुरुआती साधकों और 'बाल संगत' के लिए सर्वश्रेष्ठ, ताकि भटकता मन ध्वनि से वापस आए।
फुसफुसाहट। होंठ हिलते हैं पर आवाज नहीं आती। यह वैखरी से अधिक प्रभावशाली है क्योंकि ऊर्जा भीतर संचित होती है।
मन ही मन जप। न होंठ हिलें, न जीभ। यह हजार गुना शक्तिशाली है, पर इसके लिए उच्च एकाग्रता चाहिए।
सर्वोच्च अवस्था। जब जप श्वास-प्रश्वास में घुल जाए। यह 'बैकग्राउंड प्रोसेसिंग' की तरह 24 घंटे चलता रहता है।
दरबार के सत्संग और नाम जप सत्रों से युवाओं के मानसिक स्तर में क्रांतिकारी बदलाव देखा गया है।
'कोर्टिसोल' (Stress Hormone) घटता है और 'डोपामाइन' (Natural High) संतुलित होता है।
भटकता मन एकाग्र होता है। छात्रों के लिए यह 'ब्रेन बूस्टर' है।
हनुमान जी की भक्ति से निर्भयता आती है। युवा व्यसनों (Addiction) को छोड़ने में सक्षम होते हैं।
दरबार का विजन: "वेदों के साथ कोडिंग" (Vedas with Coding)। परंपरा और आधुनिकता का संगम।
जब दिमाग 'हैंग' (Hang) हो जाए, तो 10 मिनट का नाम जप 'रिबूट' बटन का काम करता है। यह मेंटल रिफ्रेशमेंट है।
आधुनिक 'Lo-fi' बीट्स के साथ हनुमान चालीसा। आध्यात्मिकता अब 'कूल' (Cool) और लाइफस्टाइल का हिस्सा है।
बचपन में न्यूरोप्लास्टिसिटी सबसे अधिक होती है। बच्चों को संस्कार देना उन्हें भविष्य के तनाव से बचाने का 'मानसिक टीकाकरण' है।
"राम" नाम का उच्चारण करें और मनके को स्पर्श (क्लिक) करें।
"एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी में पुनि आध।
तुलसी संगत साधु की, हरै कोटि अपराध॥"